प्रोफेसर नयाल ने कहा कि अगर प्यार को युवा पीढ़ी फिजिकल अट्रैक्शनको प्यार समझ लेती है यह गलत है. प्यार मानसिक रूप से करने की जरूरत है. अगर आप प्यार में असफल हो गए हैं, तो आप अपने को मोटिवेट कर सकते हैं और पुनः अपने प्यार को दोबारा पा सकते हैं.

रोहित भट्ट/ अल्मोड़ा. आजकल के दौर में प्यार एक ऐसी चीज है, जब हो जाता है तो सब कुछ ठीक चलता है, पर जब बात ब्रेकअप की होती हैं, तब दूरियां बढ़ने के साथ दिल पर भी गहरी चोट लगती है. ऐसा लगता है कि उस व्यक्ति के जाने के बाद से दुनिया खत्म सी हो गई है. उस वक्त ऐसा भी लगता है कि आपके घर परिवार, रिश्तेदार और दोस्त आपके लिए हैं ही नहीं. वो आपका दर्द नहीं समझ सकते.

प्यार का दिन यानी वैलेंटाइन डे (Valentine’s Day 2024) आने में कुछ दिन बाकी रह गए हैं. इस दिन लोग अपने प्यार का इजहार करते हैं. हालांकि प्रपोज करने का ये मतलब नहीं है की सभी लोगों को प्यार मिल ही जाता है. इसमें कुछ सफल हो जाते हैं, तो कई का दिल टूट जाता है.

अगर आपका दिल भी प्यार में टूटा है, तो आपको थोड़ा खुद को संभालने की जरूरत है. इस चीज से निकलने में थोड़ा समय लगेगा, पर आप इससे बाहर निकल सकते हैं. इसको लेकर ‘लोकल 18’ की टीम ने उत्तराखंड के अल्मोड़ा में कार्यरत मनोविज्ञान की प्रोफेसर मधु लता नयाल से खास बातचीत की.

भारतीय संस्कृति में 365 दिन हैं प्यार के

प्रोफेसर नयाल ने कहा कि कुछ दिनों बाद वैलेंटाइन डे आ रहा है. अगर उसी संदर्भ में बात की जाए, तो यह पाश्चात्य संस्कृति का प्रतीक है, पर भारतीय संस्कृति में 365 दिन ही प्रेम होना चाहिए. ऐसा नहीं है कि वैलेंटाइन डे के समय ही लड़का या लड़की एक दूसरे को प्रपोज करें. अन्य दिन भी वह बातचीत कर सकते हैं क्योंकि उस समय उनकी धारणा अलग भी हो सकती है. आजकल की पीढ़ी इसे अलग परिपेक्ष में देखती है.

अक्सर लोग प्यार को सफल और असफल होना के रूप में मान लेते हैं, पर ऐसा नहीं होना चाहिए. प्रेम में मिली असफलता को असफलता नहीं समझना चाहिए क्योंकि आप प्यार मानसिक रूप से करते हैं.