घर के बुजुर्गों को हेल्दी रखने के लिए लोग डॉक्टर्स और दवाइयों की मदद लेते हैं. हालांकि बुजुर्गों का हैप्पीनेस सीक्रेट घर के लोग ही होते हैं. ऐसे में बुजुर्गों से उनकी परेशानी पूछने, घर में सेफ्टी फीचर इंस्टाल करने और उन्हें अकेलेपन से दूर रखने जैसे कुछ टिप्स अपनाकर आप बुजुर्गों को फिजिकली और मेंटली फिट रखने के साथ-साथ हमेशा खुश भी रख सकते हैं.

बुजुर्गों की परेशानी समझें:

रोजमर्रा के बिजी शेड्यूल के कारण लोग अक्सर बुजुर्गों की परेशानी को नजरअंदाज कर देते हैं. वहीं बच्चों की डांट के डर से कई बार बुजुर्ग भी अपनी समस्याएं किसी से शेयर नहीं करते हैं. ऐसे में ग्रैंडपेरेंट्स से उनकी परेशानी के बारे में पूछें. साथ ही उनके साथ समय बिताते हुए उनकी आदतों को ऑब्जर्व करें. जिससे आप उनकी तकलीफ को आसानी से दूर कर पाएंगे.

घर को सुरक्षित बनाएं:

घर में मौजूद कुछ चीजें बुजुर्गों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती हैं. इसलिए घर में बुजुर्गों के अनुसार सेफ्टी फीचर्स लगवाना ना भूलें. ऐसे में घर की सीढ़ियों से लेकर शॉवर सीट, टॉयलेट सीट और रैंप को बुजुर्गों की सुविधा के अनुसार बनवाएं. वहीं घर में फिसलन वाले टाइल्स लगवाने की गलती बिल्कुल ना करें. इससे बुजुर्गों के गिरने का डर रहता है.

थेरेपिस्ट के पास ले जाएं:

बुजुर्गों को फिट और एक्टिव रखने के लिए आप उन्हें डॉक्टर या थेरेपिस्ट के पास ले जा सकते हैं. ऐसे में थेरेपिस्ट से आप शॉर्ट वॉक या योगा जैसी कुछ फिजिकल एक्टिविटीज के बारे में पूंछ सकते हैं. जिससे बुजुर्ग फिजिकली फिट रहेंगे. वहीं शारीरिक गतिविधियां करने से वो काफी स्ट्रेस फ्री और रिलैक्स भी महसूस कर सकते हैं.

घर पर करें देखभाल:

वृद्धावस्था में बीमार पड़ने पर लोग अक्सर बुजुर्गों को अस्पताल में भर्ती कर देते हैं. बेशक हॉस्पिटल में मौजूद नर्स और डॉक्टर्स उनकी अच्छे से देखभाल करते हैं. मगर बुजुर्गों की फास्ट रिकवरी के लिए आप घर को हॉस्पिटल में तब्दील कर सकते हैं. ऐसे में अगर बुजुर्गों की कंडीशन नॉर्मल है, तो आप घर पर उनके लिए एक केयर टेकर रख सकते हैं. इससे घर के माहौल में बुजुर्ग काफी बेहतर महसूस करेंगे और जल्दी ठीक हो जाएंगे.

बुजुर्गों को अकेलेपन से दूर रखें:

बुजुर्गों को अक्सर घर के लोग कुछ खास तवज्जो नहीं देते हैं. ऐसे में सबके साथ रहते हुए भी वो काफी अकेला महसूस करते हैं. इसलिए फैमिली डिसकशन में बुजुर्गों को जरुर शामिल करें और हर अहम चीजों पर उनकी राय लेना ना भूलें. इससे बुजुर्ग भी खुद को परिवार का हिस्सा मानेंगे. इसके अलावा बुजुर्गों को सोसाइटी के लोगों के साथ भी उठने बैठने की सलाह दें. जिससे वो अकेलेपन का शिकार होने से बच सकेंगे और मानसिक रूप से तनाव मुक्त रहेंगे.